ਟੈਗ » Ghazal

मर रहा है

क्या हाल बताऊँ देश का ?
देश में लगता है भगवान मर रहा है |
वहाँ मेरा किसान मर रहा है,
वहाँ मेरा जवान मर रहा है |

कौनसे मज़हब की बात बताऊँ ?
मज़हब तो भूखे गिद् खा गए |
वहाँ मेरा हिंदू मर रहा है,
वहाँ मेरा मुसल्मान मर रहा है

हर एक दौड़ में है,
बाँट रहे है अपनी सरहदें चुपचाप |
वहाँ मेरा रेगिस्तान मर रहा है,
वहाँ मेरा गुलिस्तां मर रहा है |

एक कोख से जन्म लिया पर,
दोनों बच्चे निकले कितने अजब |
वहाँ मेरा हिंदूस्तान मर रहा है,
वहाँ मेरा पाकिस्तान मर रहा है |

Ghazal

Ittar Night, A Ghazal

“Where are you now? Who lies beneath your spell tonight?

Who else from rupture’s road will you expel tonight.”     – Tonight by Agha Shahid Ali… 132 more words

#amwriting

मैंने काला रंग चढ़ा रखा है

दुनिया ने खूब पंगा पड़ा रखा है,
इसलिए मैंने काला रंग चढ़ा रखा है |

बेकार ही ज़िंदगी को मुअम्मा बना रखा है,
इसलिए मैंने काला रंग चढ़ा रखा है |

दिल में इतनी नफरत का लोहा जड़ा रखा है,
इसलिए मैंने काला रंग चढ़ा रखा है |

सब ने सफ़ेद रंग में अपना रंग लगा रखा है,
इसलिए मैंने काला रंग चढ़ा रखा है |

मैंने अपने आप को अजब बना रखा है,
इसलिए मैंने काला रंग चढ़ा रखा है |

Ghazal

मैं तुम्हे नहीं बोलता

मैं तुम्हे नहीं बोलता, तुम मुझे क्यों बोलते हो ?
छोडो मुझे, मेरी ज़िंदगी में क्यों ज़हर घोलते हो ?
मैं तो तुम्हे नहीं कहता बदलने को ?

तुम मुझे क्यों बदलने को बोलते हो ?
मैं तुम्हे नहीं बोलता, तुम मुझे क्यों बोलते हो ?

मेरे दिल की जानिब क्या ताकते रहते हो ?
अपने सड़े हुए दिल को क्यों नहीं टटोलते हो ?
मैं तुम्हे नहीं बोलता, तुम मुझे क्यों बोलते हो ?

मैं अजब हूँ, तुम अलग हो, सब अलग-अलग,
मुझे क्यों पुराने तराज़ू में तोलते हो ?
मैं तुम्हे नहीं बोलता, तुम मुझे क्यों बोलते हो ?

Ghazal

"Barker" (After Workshopping)

is “Laika” translated in my language and perhaps
we aren’t as foreign as I first thought, these poems

barking at the moon in limp lines while her memory… 142 more words

Poem

मैं रक़्क़ासा

मैं रक़्क़ासा मेरे यार की |
मैं शौक़ीन मेरे प्यार की |

मेरी आँखें गोया हज़ार माहताब,
जन्नत अधूरी मिसाल मेरे निगार की |

शराब ने सीखा मुझसे पीना,
नशा बात करता मेरे ख़ुमार की |

मुझसे है ये कायनात ज़ायेदा,
दीवाने रह तकते मेरे इक़रार की |

तेरा-मेरा मिलना तो तय था,
देख दास्ताँ मेरे क़रार की |

मैं इश्क़, कहीं फ़ना न हो जाऊं,
इम्तिहान मत लेना मेरे प्यार की |

दिलबर तुझ पर लूटा दूंगी,
पत्तियां सब मेरे चिनार की |

हर हयात में करेगी अजब,
दुनिया मेरे मज़ार की |

Ghazal

Jagjit singh:"I make sure that the words used in the ghazal are simple and understandable for common audience"

Q: What qualities do you look for in the poetry before choosing a ghazal for a musical composition?

Jagjit singh : Apart from the technical specifications to qualify as a ghazal, I am looking for a new thought in the poetry. 77 more words